Wednesday, December 26, 2018

अफ़गानिस्तान: तालिबान के पास आख़िर पैसा आता कहां से है?

लेकिन अब ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि अमरीकी सरकार अफ़गानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुलाने की योजना बना रही है.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैन्य टुकड़ियां तालिबान समेत दूसरे चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ लड़ाई में अफ़गान सरकार का सहयोग कर रही हैं.

अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं ने तालिबान को साल 2001 में ही अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता से बाहर कर दिया था.

इसके बावजूद अब भी तालिबान के पास लगभग साठ हज़ार लड़ाके हैं. यही नहीं, बीते 17 साल में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के क्षेत्रीय नियंत्रण में बढ़ोतरी हुई है. अफ़ग़ानिस्तान सरकार और तालिबान के बीच संघर्ष बढ़ता जा रहा है.

इस तरह के चरमपंथी अभियानों को अंजाम देने के लिए भारी आर्थिक सहायता की ज़रूरत होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि तालिबान को यह आर्थिक मदद कहां से मिलती हैं.

आख़िर कितना रईस है तालिबान?

तालिबान ने साल 1996 से 2001 तक अफ़ग़ानिस्तान पर राज किया है. इस दौरान अफ़ग़ानिस्तान में शरिया कानून लागू था.

इस संगठन से जुड़े धन के आवागमन को समझना एक तरह से कयास लगाने जैसा ही होता है.

क्योंकि ये ख़ुफिया चरमपंथी संगठन अपने खातों से जुड़ी जानकारी प्रकाशित नहीं करते.

लेकिन बीबीसी ने अफ़ग़ानिस्तान के अंदर और बाहर ऐसे कई लोगों का साक्षात्कार किया है जिसके आधार पर पता चलता है कि तालिबान एक बेहद ही जटिल आर्थिक तंत्र चलाता है और चरमपंथी अभियानों को अंजाम देने के लिए कराधान प्रणाली (टैक्सेशन सिस्टम) का इस्तेमाल भी करता है.

साल 2011 में इस संगठन की वार्षिक आय लगभग 28 अरब रुपये थी. लेकिन ऐसा माना जाता है कि अब ये आंकड़ा बढ़कर 105.079 अरब रुपये हो सकता है.

अफ़ग़ानिस्तान और अमरीकी सरकार उन नेटवर्कों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही है. अब से कुछ समय पहले अमरीकी सरकार ने नशीले पदार्थ बनाने वाली प्रयोगशालाओं पर बमबारी करने की रणनीति बनाई थी.

लेकिन तालिबान की कमाई सिर्फ नशे के कारोबार से नहीं होती है.

संयुक्त राष्ट्र ने 2012 में उस धारणा के ख़िलाफ़ चेतावनी दी थी जिसके तहत ये माना जाता था कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की कमाई का मुख्य स्रोत अफ़ीम की खेती है.

अफ़ग़ानिस्तान दुनिया में अफ़ीम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां जितनी अफ़ीम हर साल पैदा होती है उसे निर्यात किया जाए तो 105 से 210 अरब रुपये की धनराशि पैदा होगी.

अफ़ीम की खेती एक बड़ा व्यापार है. दुनिया भर में हेरोइन की ज़्यादातर आपूर्ति भी इसी क्षेत्र से होती है.

अफ़ग़ानिस्तान में अफ़ीम की खेती वाले क्षेत्र के एक हिस्से पर सरकार का नियंत्रण है. लेकिन अफ़ीम की खेती वाले ज़्यादातर हिस्से पर तालिबान का नियंत्रण है.

ऐसा माना जाता है कि ये तालिबान की आय का बड़ा स्त्रोत है.

लेकिन तालिबान इस व्यापार के अलग-अलग स्तरों पर टैक्स लेता है.

अफ़ीम की खेती करने वाले किसानों से 10 प्रतिशत उत्पादन टैक्स लिया जाता है.

इसके बाद अफ़ीम को हेरोइन में बदलने वाली प्रयोगशालाओं से भी टैक्स लिया जाता है. यही नहीं, इस अवैध व्यापार को करने वाले व्यापारियों से भी टैक्स वसूला जाता है.

इस तरह इस व्यापार में हर साल तालिबान का हिस्सा लगभग 7 अरब रुपये से लेकर 28 अरब रुपये के बीच होता है.

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